बिहार की इथेनॉल इंडस्ट्री बर्बादी के कगार पर, रोजगार का संकट गहराया
केंद्र सरकार की नई नीति की वजह से बिहार के 14 डेडीकेटेड इथेनॉल प्लांट गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। इसकी वजह से हजारों लोगों की रोजी रोटी प्रभावित हुई है।
बड़े धूम धाम से बिहार में 14 डेडीकेटेड इथेनॉल प्लांट DEP लगाए गए थें। अब केंद्र सरकार की एक नीति की वजह से ये सभी इथेनॉल प्लांट पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इसकी वजह से ये प्लांट या तो बंद हो गए हैं या आधे अधूरे चल रहे हैं। पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण की घोषणा के बाद बिहार के इथेनॉल इंडस्ट्री में बड़ा निवेश हुआ था।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नई इथेनॉल पॉलिसी के तहत तेल विपणन कंपनियों ने इथेनॉल की खरीद को 50% तक सीमित कर दिया है। इसकी वजह से बिहार की इथेनॉल इंडस्ट्री बुरी तरह प्रभावित हुई है। अब बिहार के कई इथेनॉल प्लांट अपनी आधी क्षमता पर ही संचालित हो रहे हैं।
खास बात यह है कि नियमों के तहत इथेनॉल की बिक्री खुले बाजार में नहीं होती है। इसे जब भी खरीदा जाएगा तो कोई तेल विपणन कंपनियों के द्वारा ही खरीदा जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह करार हुआ था कि बिहार की इथेनॉल इंडस्ट्री जितना भी उत्पादन करेंगी, वो सभी यानी 100% तेल विपणन कंपनियां ही खरीदेंगी लेकिन नियमों में बदलाव के बाद यह करार टूट गया है।
राज्य के उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा है कि इथेनॉल इंडस्ट्री पर जारी संकट के लिए वो जल्द ही केंद्र सरकार से मुलाकात करेंगे और इस विषय पर ध्यान आकृष्ट कराएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई है कि इथेनॉल इंडस्ट्री पर आया यह संकट दूर हो जाएगा।
बता दें कि 01 नवंबर 2025 से केंद्र सरकार ने इथेनॉल खरीद के नियमों में बदलाव करते हुए इसे 100% से कम कर 50% कर दिया है। यह नीति बिहार के साथ साथ महाराष्ट्र के भी इथेनॉल इंडस्ट्री पर लागू हुआ है। इस नए नीति की वजह से बिहार के इथेनॉल इंडस्ट्री का संचालन मुश्किल हो चुका है।
बिहार के वैशाली जिले का ग्लोबस स्पिरिट लिमिटेड कंपनी पिछले 03 सप्ताह से बंद पड़ा है। फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों को अपनी रोजी रोटी छीनने का डर सता रहा है। यहां लगभग 250 कर्मचारी काम करते हैं। इथेनॉल आपूर्ति में कटौती से किसान भी प्रभावित हो हैं।
मुजफ्फरपुर में भी चल रहे इथेनॉल प्लांट या तो बंद हो चुके हैं या आंशिक रूप से चल रहे हैं। बेगूसराय का इथेनॉल प्लांट भी पिछले 20 दिनों से बंद है। बक्सर जिले के नवानगर औद्योगिक परिसर प्लांट भी दिसम्बर महीने से ही बंद है। यहां 600 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है।
एक तो बिहार पहले ही बेरोजगारी और पलायन का दंश झेल रहा है। अब इस नीति ने स्थिति को और भी खराब कर दिया है।
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