तेजस्वी अगर राज्यसभा गए तो बिहार की राजनीति पर असर !
लालू प्रसाद यादव के बाद दिल्ली में राजद के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं है। ऐसे में तेजस्वी यादव किसी दलित या पिछड़े वर्ग के नेता को विपक्ष का नेता बना कर केंद्र और बिहार की राजनीति में अपनी पकड़ बनाए रखना चाहेंगे।
Tejashwi Yadav Rajyasabha तेजस्वी राज्यसभा गए तो बिहार की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा....
बिहार के सियासी गलियारे में चर्चा तेज़ है कि राजद के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी यादव अब राज्यसभा जा सकते हैं। हालांकि इस पर राजद की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन अटकलों का बाजार गरम है...
आज हम पड़ताल करेंगे कि अगर तेजस्वी के राज्यसभा जाने की ख़बर अगर सही साबित होती है तो इसका बिहार की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा !
इसके लिए आपको अतीत में चलना होगा। याद कीजिए साल 2004 का लोकसभा चुनाव। यूपीए गठबंधन को अपार सफलता मिली। लालू प्रसाद यादव बिहार की राजनीति की बागडोर अपनी पत्नी और तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सौंप कर दिल्ली चले गए केंद्र की राजनीति करने...
लालू प्रसाद यादव यूपीए की सरकार में रेल मंत्री बन गए। रेल मंत्री के तौर पर लालू ने खूब सुर्खियां बटोरी। खूब चर्चा हुई। देश और दुनिया में लालू का नाम हो रहा था लेकिन धीरे धीरे बिहार की सत्ता में लालू के पांव के नीचे से जमीन खिसकती जा रही थी। राष्ट्रीय राजनीति में लालू का कद बढ़ रहा था पर बिहार में अन्दर ही अन्दर उनका जनाधार खोखला हो रहा था।
रेलमंत्री बनने के दस महीनों के भीतर ही बिहार विधानसभा के चुनाव हुए। जनता ने लालू से सत्ता छीन ली। राबड़ी देवी मुख्यमंत्री नहीं रही। राजद की सत्ता उसी वक्त चली गई जो आज तक लौट कर नहीं आई। बिहार की राजनीति के रंग ढंग, दशा दिशा सब कुछ बदल चुका है। अब तेजस्वी भी उसी राह पर हैं। अगर तेजस्वी राज्यसभा जाते हैं तो एक तरह से उनकी एंट्री राष्ट्रीय राजनीति में हो जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार तेजस्वी ने अखिलेश यादव का रास्ता पकड़ लिया है। अखिलेश यादव लोकसभा में गरजते हैं तो राष्ट्रीय राजनीति में उनकी धमक महसूस होती है, दूसरी तरफ वो यूपी की राजनीति के भी सबसे बड़े चेहरे भी बनें हुए हैं।
इसके पीछे की वजह यह है कि वर्तमान माहौल में बिहार की राजनीति में तेजस्वी यादव के लिए कोई बहुत भूमिका नहीं बची है। अभी बिहार विधानसभा चुनाव में लगभग पांच साल का वक्त बचा हुआ है। तब तक तेजस्वी कमजोर विपक्ष का नेतृत्व करना नहीं चाहेंगे।
लालू प्रसाद यादव के बाद दिल्ली में राजद के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं है। ऐसे में तेजस्वी यादव किसी दलित या पिछड़े वर्ग के नेता को विपक्ष का नेता बना कर केंद्र और बिहार की राजनीति में अपनी पकड़ बनाए रखना चाहेंगे।
My Opinion: तेजस्वी यादव को चुनाव नतीजों से हताश निराश उदास नहीं होना चाहिए। वो युवा हैं, ऊर्जावान हैं। राजनीति में एक हार आने वाली जीत का रस्ता खोलता है। ऐसे में तेजस्वी को डट कर बिहार में ही रहना चाहिए। विपक्ष का नेता बनें रहना चाहिए। बिहार में एकजुट एनडीए को हराना मुश्किल है, नामुमकिन नहीं...और ये काम तेजस्वी ही कर सकते हैं।
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