बंगाल में नितिन नवीन की ताजपोशी से कोई असर नहीं पड़ने जा रहा है...तरस आती है ऐसे पत्रकारों की बुद्धि पर

मीडिया का एक वर्ग खबर चला रहा है कि नितिन नवीन के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पश्चिम बंगाल में बीजेपी को बहुत फायदा होगा। कुछ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेष्क यहां तक पहुंच गए कि बताने लगें कि नितिन नवीन की वजह से अब बंगाल में ममता बनर्जी का हारना और बीजेपी का जीतना तय हो गया है।

Dec 16, 2025 - 14:25
Dec 16, 2025 - 14:27
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बंगाल में नितिन नवीन की ताजपोशी से कोई असर नहीं पड़ने जा रहा है...तरस आती है ऐसे पत्रकारों की बुद्धि पर

इन दिनों हमारे देश की मीडिया को एक अलग तरह की बीमारी लगी हुई है, बिना वजह गुणगान करने की.... बिहार के भाजपा नेता नितिन नवीन कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए। अब हमारी मीडिया में नितिन नवीन की तारीफ में इतने कसीदे पढ़ने शुरु कर दिए कि खुद नितिन नवीन को यह बात नहीं पता होगी कि उनके अंदर कितनी खूबियां हैं।

मीडिया का एक वर्ग खबर चला रहा है कि नितिन नवीन के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पश्चिम बंगाल में बीजेपी को बहुत फायदा होगा। कुछ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेष्क यहां तक पहुंच गए कि बताने लगें कि नितिन नवीन की वजह से अब बंगाल में ममता बनर्जी का हारना और बीजेपी का जीतना तय हो गया है।

अब इसकी वजह भी बताई जाने लगी कि चूंकि नितिन नवीन कायस्थ हैं और पश्चिम बंगाल में कायस्थों की बड़ी आबादी है। इस वजह से बंगाल कायस्थ अब भाजपा के साथ जाएंगे। अब इससे ज्यादा हास्यास्पद कुछ भी नहीं हो सकता। बंगाली कायस्थ एक बिहारी कायस्थ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाने से सब बीजेपी के साथ जाएंगे।

ऐसी समीक्षा करने और विश्लेष्ण करने वाले पत्रकारों की बुद्धि पर तरस आता है। अगर बिहारी कायस्थ नितिन नवीन के भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाने की वजह से बंगाल के कायस्थ भाजपा के साथ चले जाएंगे तो उस हिसाब से देश भर के ब्राह्मणों को तो ममता बनर्जी के साथ चले जाना चाहिए क्योंकि ममता बनर्जी तो ब्राह्मण हैं।

राजनीति की थोड़ी बहुत समझ रखने वालों को यह बात पता है कि बंगाल और बिहार की राजनीति में जमीन और आसमान का फर्क है। बिहार में जातिवाद की राजनीति होती है जबकि बंगाल में अपनी क्षेत्रीय अस्मिता की राजनीति होती है। बिहार में जाति और धर्म के आधार पर वोटिंग होती है जबकि बंगाल अपनी संस्कृति और अपनी पहचान के आधार पर वोटिंग करते हैं।

ऐसे में नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाने से बंगाल की राजनीति पर उतना ही असर पड़ेगा जितना नवजोत सिंह सिद्धु के पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बन जाने से तमिलनाडु पर....

राजनीतिक विश्लेष्कों और दक्षिणपंथी रुझान वाले पत्रकारों की यह हालत हो चुकी है कि वो हर कदम को मास्टर स्ट्रोक ही बताना शुरु कर देते हैं और हर फैसले को एक्शन प्लान और पता नहीं क्या क्या बताने लगते हैं।

आपको बता दें कि अगले कुछ महीनों में पश्चिम बंगाल में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। यह चुनाव मोटे तौर पर ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच ही होंगे। टक्कर कांटे की बताई जा रही है। ममता बनर्जी जहां इस चुनाव को बंगाली अस्मिता के आधार पर लड़ेंगी तो वहीं भारतीय जनता पार्टी यहां हिंदू बनाम मुस्लिम करने की अपनी सर्वाधिक सफल और अचूक रणनीति पर चुनाव लड़ेगी।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चाहे नितिन नवीन हो या जेपी नड्डा...बंगाल की राजनीति पर इसका कोई प्रभाव या दुष्प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। चुनाव ममता बनर्जी और नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही होगा। बंगाली मानुष दीदी या दादा के चेहरे पर ही वोट करेगा।

 

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SIMRANJEET SINGH Diploma in media studies ( Ranchi ),8 years experience in news media, Political Expert Chief editor in Bihar News