पहले पैसे दो, फिर वापस मांग लो, बिहार चुनाव में इजाद हुआ नया फॉर्मूला !

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लगने के बाद महिलाओं के खाते में दस दस हजार रुपये भेजे जाने की काफी आलोचना हुई थी, हालांकि चुनाव आयोग ने इस पर कोई एक्शन नहीं लिया था।

Dec 17, 2025 - 09:42
Dec 17, 2025 - 10:03
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पहले पैसे दो, फिर  वापस मांग लो, बिहार चुनाव में इजाद हुआ नया फॉर्मूला !

बिहार विधानसभा चुनाव में महिलाओं के खाते में दस दस हजार रुपये भेजे जाने की खूब चर्चा हुई। राजनीति के जानकारों का मानना है कि इस दस हजार रुपये ने खूब कमाल किया और प्रचंड बहुमत से एनडीए की सत्ता में वापसी हो गई। दस हजार रुपये का ये जलवा रहा कि सारे समीकरण, सारे गणित धरे के धरे रहे गए और तमाम सत्ता विरोधी लहर की हवा निकल गई। 

पर बात इतने पर ही खत्म नहीं होती। अब खबर चल रही है कि बैंकों ने कई लोगों को नोटिस किया है कि गलती से आपके खाते में पैसे चले गए हैं। अब पैसे वापस करो। बताया जा रहा है कि भूलवश महिलाओं की जगह पुरुषों के खाते में दस हजार रुपये भेज दिए गए हैं। अब बेचारे पीड़ित पुरुष कह रहे हैं कि छठ पर्व के समय में ये पैसे दिए गए थें। ये पैसे तो पर्व त्योहार में ही खत्म हो गए, अब ये पैसे हम कहां से वापस करं 

दस हजार रुपये वाली योजना का नाम बिहार महिला रोजगार योजना दिया गया। कहा गया कि इस 10 हजार रुपये से महिलाएं रोजगार कर सकेंगी और आत्मनिर्भर बन सकेंगी। अब इस महंगाई के दौर में 10 हजार रुपये में कौन सा रोजगार शुरु होगा, ये तो अपने आप में ही बड़ा सवाल है और इसके बावजूद चुनाव के बीच में खाते में पैसे ट्रांसफर करना क्या चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन नहीं था ? आरजेडी ने इस सवाल को अब प्रमुखता से उठाना शुरु कर दिया है। 

बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने आज सुबह सुबह एक ट्वीट किया कि इस बार के बिहार विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग की मदद से सत्तारुढ दल ने चुनाव जीतने से जुड़े हुए 02 फॉर्मूले इजाद हुए। पहला कि बीच चुनाव पैसे बांट दो और दूसरा कि वोट लेकर चुनाव बाद पैसे वापस ले लो ! 

आरजेडी की ओर से आगे लिखा गया है कि इसका सौजन्य वर्तमान भाजपाई चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को जाता है। इसके साथ ही आरजेडी ने कहा है कि 5 साल या 20 साल, कितनी ही घटिया सरकार चलाओ, बीच चुनाव जनता के पैसे जनता में ही बांटकर फटेहाल व्यवस्था पर अस्थाई चुनावी रफू कर लो। 

आरजेडी का यह पोस्ट बिहार की नीतीश कुमार की सरकार के साथ ही देश के चुनाव आयोग पर कटाक्ष है। चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को भाजपाई बताया जा रहा है। 

राजनीति में आरोप प्रत्यारोप अपनी जगह है लेकिन जिस तरह से बिहार विधानसभा चुनाव में आचार संहिता के बीच लोगों के खाते में दस दस हजार रुपये डाले गए, वो निष्पक्ष लोगों के गले नहीं उतर रहा था। ये तो सीधे सीधे वोट खरीदने की कवायद बताई गई। विपक्ष ने लगातार चुनाव आयोग को इस बात की जानकारी दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की।


उस वक्त ही चुनाव आयोग पर लगातार विपक्ष की ओर से लगातार सवाल खड़े किए गए लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। अब विपक्षी दलों को लगता है कि बीच चुनाव में खाते में दस दस हजार रुपये भेजे जाने से चुनाव का नतीजा उनके मनमाफिक नहीं आया। 


अब जिस तरह से राजद का यह पोस्ट और ट्वीट सामने आया है, उससे यह साफ है कि अब चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच का संघर्ष आने वाले दिनों में और तेज होने जा रहा है। 

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