अफसरों का प्रमोशन नहीं होगा आसान, नीतीश सरकार का नया फरमान !
बिहार में अब सरकारी अफसरों की प्रोन्नति के लिए राज्य की नीतीश कुमार की सरकार ने नए नियम लागू कर दिए हैं। प्रमोशन प्रक्रिया की अब कड़ी निगरानी होगी। प्रमोशन अब आसान नहीं होगा।
अब किसी भी सरकारी अफसर या कर्मचारी को प्रमोशन देने से पहले सरकार उनका पूरा रिकॉर्ड चेक करेगी। ट्रैक रिकॉर्ड साफ सुथरा रहा तभी उन्हें प्रमोशन मिलेगा। जाहिर तौर पर अब बिहार में अधिकारियों का प्रमोशन अब आसान नहीं रह जाएगा। भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए यह बुरी खबर है।
नियमों के अनुसार अब एक साल में 02 बार सरकारी अफसरों की सूची तैयार की जाएगी। जनवरी और जुलाई में ऐसे सरकारी अफसरों और कर्मचारियों की लिस्ट प्रशासी विभागों को सौंपी जाएगी जिनका चरित्र दागदार है। जिन कर करप्शन से जुड़े मामले दर्ज होंगे।
सभी अधिकारियों की कार्यशैली पर सरकार की निगाहें रहेंगी। लगातार करप्शन से जुड़े मामलों के सामने आने के बाद सरकार ने प्रमोशन प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखनी शुरू कर दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार निगरानी विभाग ने यह साफ कर दिया है कि जिन सरकारी अफसरों और कर्मचारियों पर प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है या आरोप पत्र दायर हो चुका है, उनको प्रमोशन देने से पहले " निगरानी स्वच्छता निर्धारण " के दायरे से होकर गुजरना पड़ेगा।
विभागों को निर्देशित किया गया है कि पारदर्शी लिस्ट का अवलोकन किए बगैर किसी भी सरकारी अफसर या कर्मचारी को प्रमोशन न दिया जाए। साफ है कि करप्शन पर बिहार सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस की है।
निगरानी विभाग ने इस सम्बन्ध में सभी विभागों और कार्यालयों को पत्र जारी कर दिया है। अब फाइलों के आधार पर नहीं बल्कि पारदर्शी लिस्ट के माध्यम से प्रमोशन तय होगा। यह लिस्ट ही बताएगा कि कौन सा सरकारी अफसर या कर्मचारी प्रमोशन का पात्र है अथवा नहीं !
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