RAC टिकट...यात्रियों के साथ धोखा, रेलवे की लूट योजना !
पूरे पैसे लो और सीट आधी दो। यही तो है भारतीय रेलवे की RAC टिकट सिस्टम। कितना अजीब लगता है न एक सीट पर 02 अजनबी रात भर जागकर सफर पूरा करें। भारतीय रेलवे के इस सिस्टम को जितना कोसा जाए, उतना कम होगा।
रात भर का सफर। सोने वाला बर्थ एक, मुसाफिर दो और पैसे पूरे। यही तो है भारतीय रेलवे का RAC टिकट सिस्टम। इसे भारतीय रेलवे की लूट योजना न कहें तो और क्या कहें ! ऊपर से अगर आप रेलवे का तर्क सुन लेंगे तो अपना सिर पकड़ लेंगे।
RAC यानी Reservation Against Cancelation रेल यात्रियों के साथ धोखा है और रेलवे के लिए कमाई का भरपूर साधन। रोजाना लाखों यात्री भारतीय रेलवे की इस लूटपाट योजना का शिकार बनते हैं। पूरा पैसा देने के बावजूद न पूरी सीट मिलती है, न नींद, न आराम और न सुविधा।
महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह RAC सिस्टम बेहद परेशानी भरा हो जाता है। लंबी दूरी की यात्रा करने वालों का तो पसीना छूट जाता है। यह व्यवस्था किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होना चाहिए लेकिन कोई इस पर आवाज़ नहीं उठाता। यह रेल यात्रियों का रेलवे द्वारा शोषण है।
रेलवे का कहना है कि RAC सिस्टम उन यात्रियों के लिए सुविधा है जिनका टिकट कन्फर्म नहीं हो सका है लेकिन यात्रा उनके लिए ज़रूरी है। RAC टिकट बैठने की गारंटी हो जाता है। अब सवाल यह है कि क्या सिर्फ बैठने भर की गारंटी दे देने से रेलवे का दायित्व पूरा हो जाता है।
जब एक बर्थ को इस नियम के तहत रेलवे देता है तो फिर टिकट की आधी राशि रिफंड क्यों नहीं की जाती ? इस मुद्दे पर अब देश में आवाज़ उठनी ही चाहिए। रेलवे पैसे तो पूरा वसूल लेता है लेकिन सीट आधी देता है, यह अन्याय नहीं तो और क्या है !
एक रिपोर्ट के मुताबिक यह व्यवस्था 1985- 86 से चली आ रही है जब भारतीय रेलवे में आरक्षण की शुरुआत हुई। लगभग 40 सालों से यह लूट की व्यवस्था चली आ रही है। इसे या तो बंद करना चाहिए या फिर ऐसे यात्रियों को रिफंड देना चाहिए।
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