राज्यसभा चुनाव बिहार : कांग्रेस खामोश क्यों ?
राज्यसभा की पांचवीं सीट के लिए राजद की ओर से अमरेंद्र धारी सिंह प्रत्याशी हैं। उनकी जीत के लिए कांग्रेस के छह विधायकों के वोट की जरूरत है। राजद प्रत्याशी का मुकाबला एनडीए प्रत्याशी उपेन्द्र कुशवाहा से है। इस बीच कांग्रेस की खामोशी पर सबकी नजरें टिक गईं हैं।
राज्यसभा की पांचवीं सीट के लिए नामांकन कर राजद प्रत्याशी अमरेंद्र धारी सिंह ने बिहार में राज्यसभा चुनाव को दिलचस्प मोड़ पर पहुंचा दिया है। राजद प्रत्याशी अमरेंद्र धारी सिंह के लिए सभी छह कांग्रेस विधायकों के वोट बेहद महत्वपूर्ण हैं, लेकिन कांग्रेस की सक्रियता इस चुनाव में दिखाई नहीं दे रही है। इस पर सबकी निगाहें जाकर ठहर गईं हैं।
हालांकि क्रॉस वोटिंग नहीं हुई तो कांग्रेस के सभी छह विधायकों के वोट राजद प्रत्याशी अमरेंद्र धारी सिंह को ही मिलना तय माना जा रहा है लेकिन राजद प्रत्याशी को लेकर बिहार प्रदेश कांग्रेस में कोई उत्साह दिखाई नहीं दे रहा। वैसे बिहार कांग्रेस की ओर से यह बयान सुनाई पड़ा था कि हमारी वैसी कोई संख्या बल नहीं है जिससे हम राज्यसभा के लिए अपनी दावेदारी पेश करें।
दरअसल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही कांग्रेस और राजद के संबंधों में पहले जैसी आत्मीयता और नजदीकी देखने को नहीं मिल रही है। पहले जिस तरह से विभिन्न विषयों पर राजद और कांग्रेस के बीच तालमेल देखने को मिलता था, अब उसमें कमी दिखाई पड़ती है।
तेजस्वी यादव के नेतृत्व में वर्तमान विपक्ष जिसमें राजद के साथ कांग्रेस भी शामिल है विधानसभा के बीते सत्र में वैसी कोई क्षमता या संयुक्त विरोध का स्वर दिखाई नहीं पड़ा। राज्यसभा चुनाव को लेकर कोई संयुक्त बैठक का दृश्य दिखाई नहीं पड़ा।
कई राजनीतिक जानकारों का यहां तक मानना है कि बीते दिनों जो कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और जनसुराज के प्रशांत किशोर के साथ मुलाकात की खबरें आई थीं, कहीं न कहीं उसमें सच्चाई थी क्योंकि मुलाकात की न तो कोई आधिकारिक पुष्टि हुई और ना किसी ने उसका खंडन किया।
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