भाजपा जेडीयू के नेताओं को किस हैसियत से पटना में सरकारी बंगला दिया गया है, विपक्ष ने पूछे सवाल, सरकार के पास कोई जवाब नहीं....
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का। नीतीश कुमार अब बिहार के सीएम नहीं हैं। वो बिहार विधान मंडल के सदस्य भी नहीं हैं। अब वो राज्यसभा के लिए निर्वाचित होकर दिल्ली जा चुके हैं। इसके बावजूद नीतीश कुमार को पटना में सरकारी बंगला आवंटित किया गया है।
राबड़ी आवास खाली कराने के बहाने भाजपा,जेडीयू और एनडीए की पोल खुल गई है। बिहार में इन दिनों सरकारी आवास को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को बंगला खाली करने का आदेश सम्राट चौधरी की सरकार ने दिया है। इसी बीच राज्य की राजनीति में कुछ सवाल तेजी से खड़े हो रहे हैं। भाजपा और जदयू समेत एनडीए के कई नेता जो किसी भी पद पर नहीं हैं, वो पटना में आराम से सरकारी बंगले का मजा ले रहे हैं।
राबड़ी देवी न सिर्फ बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री हैं बल्कि बिहार विधान परिषद में विपक्ष की नेता है। पद के हिसाब से राबड़ी देवी को कैबिनेट मंत्री के समान सुविधाएं प्राप्त हैं। काफी समय से राबड़ी देवी पटना के 10 सर्कुलर रोड में रहती आ रहीं हैं। अब बिहार सरकार ने राबड़ी देवी को यह बंगला खाली करने का निर्देश मिल गया है। इसे लेकर राजनीति तेज हो गई है।
आरजेडी की ओर से साफ कर दिया गया है कि बंगला खाली नहीं किया जाएगा। बिहार सरकार चाहे तो फोर्स भेजकर खाली करवा ले। इसके साथ ही अब एनडीए के उन नेताओं का नाम पर भी आरजेडी सवाल उठा रहा है कि ये लोग किस हैसियत से बिहार में सरकारी आवास लेकर रह रहे हैं।
इनमें पहला नाम है राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का। नीतीश कुमार अब बिहार के सीएम नहीं हैं। वो बिहार विधान मंडल के सदस्य भी नहीं हैं। अब वो राज्यसभा के लिए निर्वाचित होकर दिल्ली जा चुके हैं। इसके बावजूद नीतीश कुमार को पटना में सरकारी बंगला आवंटित किया गया है।
वहीं यह भी कहा जा रहा है कि बिहार विधानसभा से इस्तीफे के बावजूद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का भी पटना में सरकारी आवास है।
उपेंद्र कुशवाहा जो राष्ट्रीय लोक मोरचा के प्रमुख हैं। वो भी बिहार में किसी पद पर नहीं हैं। उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा के सांसद हैं। बावजूद इसके उनके पास भी राजधानी पटना में आलीशान बंगला है।
इसमें जेडीयू के राज्यसभा सांसद संजय झा का भी नाम आ रहा है। संजय झा के नाम पर भी पटना में सरकारी बंगला आवंटित हैं जबकि वो बिहार में किसी भी पद पर नहीं हैं।
इसी कड़ी में वर्तमान में लोकसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का नाम भी लिया जा रहा है। जीतन राम मांझी के पास भी पटना में सरकारी बंगला है।
सीतामढ़ी के जेडीयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर का नाम भी इस लिस्ट में शामिल हैं। उनके पर भी पटना में सरकारी बंगला आवंटित है।
जाहिर तौर पर अब विपक्ष और मीडिया द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब सरकार को देना होगा।
एक पत्रकार ने इस मामले पर जब जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार से इस मामले पर सवाल पूछा कि संजय झा, जीतन राम मांझी जैसे लोगों को किस आधार पर पटना में आवास आवंटित किया गया है तो इस पर नीरज कुमार बात को इधर उधर घूमाने लगें और उन्होंने कहा कि वो इस मामले में अपडेट नहीं हैं। उनके पास इसकी जानकारी नहीं है। वो इसका पता करेंगे और इसके बाद जवाब देंगे। नीरज कुमार इस मौके पर रेंट और बिजली बिल की बात करने लगें और सरकारी प्रक्रिया की बात कहने लगें।
हालांकि आपको बता दें कि बिहार सरकार को इस बात का पूरा अधिकार है कि वो किसे बंगला आवंटित करती है अथवा किससे बंगला छीन लेती है लेकिन राजनीति तो गर्म हो ही चुकी है। अब इस मामले में आगे दिलचस्प होगा यह देखना कि सरकारी बंगला प्रकरण का अंत कहां जाकर होता है ! सवाल जब राबड़ी आवास पर उठेगा तो एनडीए के नेताओं पर भी सवाल उठेगा।
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