बिहार की राजनीति में नया मोड़, नीतीश और आरसीपी की मुलाकात

लंबे समय से खबरें चल रही थीं कि नीतीश और आरसीपी फिर से साथ आ सकते हैं लेकिन जेडीयू में मौजूद कुछ ताकतें नीतीश और आरसीपी की मुलाकात होने नहीं देना चाहती हैं। अब इन ताकतों को निराशा हाथ लगी हैं और नीतीश आरसीपी की मुलाकात हो चुकी है।

Jun 27, 2026 - 11:38
 0  0
बिहार की राजनीति में नया मोड़, नीतीश और आरसीपी की मुलाकात
RCP सिंह के सोशल मीडिया पोस्ट से साभार

सुबह सुबह बिहार की राजनीति में नया और दिलचस्प मोड़ देखने को मिला। बिहार की राजनीति में इसके बाद नई खबरों की बाढ़ आने वाली है। हुआ यूं कि कई दिनों से लग रहे कयासों के बीच आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार की मुलाकात हो गई। लंबे समय से खबरें चल रही थीं कि नीतीश और आरसीपी फिर से साथ आ सकते हैं लेकिन जेडीयू में मौजूद कुछ ताकतें नीतीश और आरसीपी की मुलाकात होने नहीं देना चाहती हैं। अब इन ताकतों को निराशा हाथ लगी हैं और नीतीश आरसीपी की मुलाकात हो चुकी है। नीतीश कुमार वर्तमान में जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और आरसीपी सिंह जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। हालांकि RCP समर्थकों ने आरोप लगाया कि MLC ललन सर्राफ और संजय गांधी ने मुलाकात नहीं होने दी पर RCP सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट कर मुलाकात की पुष्टि की है। 

पहले बात मुलाकात की कर लेते हैं और उसके बाद दूसरे मुद्दों पर आते हैं। हुआ यूं कि शनिवार की सुबह सुबह पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह पूर्व सीएम नीतीश कुमार के 7 सर्कुलर रोड वाले पटना आवास पर पहुंचते हैं। दोनों नेताओं के बीच मुलाकात होती है। जाहिर तौर पर नीतीश कुमार और आरसीपी के बीच पहले गहरे संबंध रहे हैं। दोनों के बीच मुलाकात हुई होगी तो कई निजी और कई राजनीतिक चर्चाएं भी हुई होंगी। ये बात अलग है कि पहले नीतीश कुमार एक मजबूत नेता और मुख्यमंत्री हुआ करते थें। अब वाले नीतीश कुमार एक कमजोर नीतीश कुमार हैं। अब दोनों नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात ने कई प्रकार की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। वैसे कई मीडिया रिपोर्ट्स यह बता रहे हैं कि 20 मिनट तक आमने सामने होने के बावजूद बात नहीं हुई। 

एक समय में आरसीपी सिंह, नीतीश कुमार के इतने करीबी थें कि नीतीश कुमार ने उन्हें जेडीयू का राश्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया, राज्यसभा भेजा और फिर आरसीपी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री भी बनें। केंद्र में मंत्री बनने के बाद से ही नीतीश और आरसीपी के संबंध बिगड़ गए थें। माना जाता है कि आरसीपी सिंह बिना नीतीश कुमार के इच्छा के ही केंद्र सरकार में मंत्री बन गए थें। नीतीश को इस बात का बुरा लगा था। इसके बाद से ही दोनों के बीच के संबंध खटास में तब्दील हो गए। आरसीपी ने नीतीश कुमार पर खूब जोरदार बयानी हमले किए। शायद यही वजह रही होगी कि आमने सामने होने के बावजूद दोनों नेताओं में बात नहीं हो सकी। मन की कड़वाहट जल्दी नहीं निकल पाती है। 

इसके बाद आरसीपी सिंह भाजपा के साथ भी जुड़ें लेकिन वहां उन्हें कोई विशेष लाभ या भाव नहीं मिल सका। उन्होंने अपनी एक पार्टी भी बनाई, वो भी कोई कमाल नहीं कर सका। फिर वो जनसुराज के संपर्क में आएं और अपनी बेटी को चुनाव भी लड़ाया लेकिन बेटी जीत नहीं सकी। अब सत्ता बिन आरसीपी सिंह जल बिन मछली की तरह छटपटाते रहें और जेडीयू के साथ आने को काफी समय से आतुर दिखते रहें। अब लगता है कि बात बनने वाली है और आरसीपी अपनी पुरानी पार्टी में लौटने वाले हैं। हालांकि अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है लेकिन हर किसी को इस बात का अंदाजा है कि जेडीयू में घर वापसी के लिए ही आरसीपी सिंह बेचैन हैं और लंबी जद्दोजहद के बाद उनकी नीतीश कुमार से मुलाकात संभव हो ही गई है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो यह मुलाकात आगे भी होती रहेगी। 

वैसे तो नीतीश कुमार के साथ उनके कई भरोसेमंद साथ भी रहें और साथ छोड़कर भी गए लेकिन वो सभी राजनीति से जुड़े हुए लोग थें लेकिन आरसीपी सिंह नौकरशाही से राजनीति में आए थें। आरसीपी सिंह 1984 बैच के बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी थें। वो काफी समय से नीतीश कुमार के साथ जुड़े हुए थें। लंबी प्रशासनिक पारी खेलने के बाद आरसीपी राजनीति में आएं और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उसके बाद केंद्रीय मंत्री की कुर्सी तक पहुंचे। जेडीयू में आरसीपी की ताकत यह थी कि इस पार्टी में वो टिकट तक बांटा करते थें। आज भी कई विधायक और सांसद बिहार में ऐसे मिल जाएंगे जिसे आगे बढ़ाने में आरसीपी ने भरपूर मदद की। 

आरसीपी की की राजनीतिक पारी और दलबदल को लेकर कई बातें उनके विरोध में कही जा सकती हैं लेकिन एक खास बात यह रही कि आरसीपी सिंह कभी भी लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के इर्द गिर्द भी दिखाई नहीं पड़ें। आरसीपी सिंह ने भले ही नीतीश कुमार का दामन छोड़ा हो लेकिन कभी भी उन्होंने लालू या तेजस्वी से नजदीकी बनाने का प्रयास नहीं किया। कम से कम पब्लिक डोेमेन में ऐसी कोई बात कभी सामने नहीं आई। नीतीश से अलग होने के बाद उन्होंने भाजपा का दामन थामा, अपनी पार्टी बनाई, जनसुराज को अपना समर्थन दिया लेकिन राजद के नजदीक वो कभी नहीं गए। कम से कम विचारधारा के स्तर पर आरसीपी सिंह एकही जगह पर टिके रहें। संभव है कि यही बात नीतीश कुमार को पसंद आई हो और फिर दोनों नेताओं की मुलाकात हुई हो। 

पर असली सवाल तो यह है कि आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार के बीच की मुलाकात पर उनकी भूंजा पार्टी का क्या रुख होगा ! क्या भूंजा पार्टी आरसीपी सिंह की पार्टी में एंट्री होने देगी क्योंकि भूंजा पार्टी आरसीपी सिंह को पसंद नहीं करती है। वहीं भूंजा पार्टी के रहते जेडीयू के अस्तित्व और भविष्य पर भी लगातार सवाल खड़े होते रहे हैं क्या वो आरसीपी के रहते अब संभव हो पाएगी क्योंकि आरसीपी की सबसे बड़ी ताकत उनकी जाति है। आरसीपी नीतीश कुमार के स्वजातीय यानी की कुर्मी समाज से आते हैं। कुर्मी समाज और कुर्मी वोट बैंक ही जेडीयू की सबसे बड़ी ताकत है। कुर्मी समाज के लोग आरसीपी सिंह को पसंद भी करतेे हैं। भूमिहार समाज से आने वाले ललन सिंह और विजय कुमार चौधरी, संजय झा या अशोक चौधरी जैसे नेताओं को कुर्मी समाज कभी भी अपना नेता नहीं मानेगा। नीतीश कुमार के बाद वो जेडीयू की कमान किसी कुर्मी नेता के हाथ में ही देखना चाहेगा। ऐसे में अगर आरसीपी सिंह यानी रामचंद्र प्रसाद सिंह की जेडीयू में घर वापसी होती है तो भूंजा पार्टी के लिए बड़ी मुसीबत होने वाली है क्योंकि आरसीपी अगर जेडीयू में होंगे तो सिर्फ जेडीयू की बात करेंगे। वो जेडीयू की मजबूती के लिए काम करेंगे। वरना भूंजा पार्टी तो भाजपा के करीब ज्यादा दिखाई पड़ती है। वैसे भी कई राजनीतिक विश्लेषक लगातार जेडीयू के भविष्य को लेकर आशंका और चिंताएं जाहिर कर चुके हैं। आरसीपी के आने से जेडीयू की उम्र और बढ़ सकती है, हालांकि आरसीपी की जेडीयू में घर वापसी होगी या नहीं ! नीतीश कुमार के साथ उनकी क्या बात हुई, यह साफ होने के बाद ही सब कुछ स्पष्ट हो सकेगा। परंतु यह बात बिलकुल सही है कि अभी के माहौल में न सिर्फ जेडीयू बल्कि नीतीश कुमार को भी एक आरसीपी की सख्त जरुरत है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0
SIMRANJEET SINGH Diploma in media studies ( Ranchi ),8 years experience in news media, Political Expert Chief editor in Bihar News