सम्राट चौधरी सरकार ने 1 रुपये में क्यो दी 15 एकड़ जमीन, क्या है मकसद ?
बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने मुंगेर के तारापुर में 15 एकड़ जमीन ईशा फाउंडेशन को सिर्फ 1 रुपये के टोकन मूल्य पर आवंटित की है। बताया जा रहा है कि इस जमीन पर धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र बनाया जाएगा। इससे देवघर जाने वाले भक्तों को लाभ होगा और लोगों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।
बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने मुंगेर जिले के तारापुर में 15 एकड़ एक डिसमिल का एक बड़ा जमीन का पट्टा महज 1 रुपये की टोकन राशि पर ईशा फाउंउेशन को आवंटित कर दी है। इसे एक बड़ा फैसला माना जा रहा है। सरकार ने ईशा फाउंडेशन को यह जमीन किसी व्यापारिक कार्य के लिए नहीं बल्कि इलाके को एक धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रुप में विकसित करने के लिए दिया है।
इस बेशकीमती जमीन के पट्टे को लेकर सरकार की ओर से जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक इस जमीन पर अत्याधुनिक सुख सुविधाओं से लैस एक विशाल सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, धार्मिक और पर्यटन केंद्र बनाया जाएगा। यह प्रोजेक्ट जब पूरी तरह से तैयार हो जाएगा तब यह इस क्षेत्र में नहीं बल्कि बिहार का एक प्रमुख पर्यटक केंद्र भी होगा जो देश विदेश से आने वाले भक्तों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र होगा। बिहार सरकार का उद्देश्य मुंगेर को बिहार के धार्मिक पर्यटन वाले क्षेत्रों कल सूची में शामिल करना है।
आपको बता देे कि तारापुर का इलाका प्राचीनतम अंग प्रदेश का एक अहम हिस्सा है। शिव परिपथ का यह प्रमुख पड़ाव है। सुल्तानगंज से बाबाधाम तक जाने वाली प्रसिद्ध कांवर यात्रा का मार्ग भी इस क्षेत्र से होकर गुजरता है। लााखों की संख्या में बाबा भोलनाथ के भक्त कांवरिए के रुप में इसी मार्ग से पैदल यात्रा करते हैं। एक भव्य सांस्कृतिक केंद्र बनने से इलाके में धाार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलेगी।
तारापुर में इस धार्मिक पर्यटन केंद्र के विकसित होने से स्थानीय लोगों को बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप में रोजगार मिल सकेगा। इलाके के बेरोजगारों के लिए यह केंद्र वरदान बनकर सामने आना वाला है।
बता दें कि सम्राट चौधरी सरकार बिहार की ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को दुनिया के सामने लाना चाहती है और बिहार को पर्यटन का एक महत्वपूर्ण हब बनाना चाहती है, इसी के तहत लगातार फैसले लिए जा रहे हैं। मुंगेर में सरकार यह काम ईशा फाउंडेशन के जरिए कराना चाहती है। सरकार को इस बात की पूरी आशा है कि इस फैसले से धार्मिक सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में मुंगेर का नाम और मजबूती से दर्ज हो सकेगा।
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