इधर तेजस्वी लौटेंगे, उधर 300 नेताओं पर कार्रवाई की तैयारी !
जानकारी के अनुसार करीब 300 नेताओं की लिस्ट तैयार है, जिन पर विधानसभा चुनाव में पार्टी विरोधी कार्य करने का आरोप है। इसको लेकर पार्टी नेतृत्व कड़ा रुख अपनाने के मूड में है। इन सभी पर आरोप है कि ये लोग चुनाव के दौरान दूसरे दल के प्रत्याशी की मदद कर रहे थें या फिर पार्टी लाइन से इतर बयानबाजी कर रहे थें। इस लिस्ट में कई पूर्व विधायकों और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों के नाम भी शामिल हो सकते हैं।
क्रिसमस और न्यू ईयर अगले कुछ दिनों में खत्म हो जाएगा। बिहार की जनता, मीडिया जगत और राष्ट्रीय जनता के दल नेता, कार्यकर्ता और समर्थक सभी अपने नेता तेजस्वी यादव का इंतजार कर रहे हैं। जाहिर तौर पर बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अभी अपने परिवार के साथ छुट्टियां बीता रहे हैं। जल्द ही वो बिहार की धरती पर आएंगे और पूरी तरह से एक्शन में होंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तेजस्वी यादव भले ही विदेश में हैं लेकिन राष्ट्रीय जनता दल का सांगठनिक काम जारी है। पिछले विधानसभा चुनाव के जो नतीजे आएं, उन पर तेजस्वी यादव की टीम रिसर्च का काम कर रही है। पुरानी कहावत है कि राजनीति में कभी अवकाश नहीं होता। चुनावों के नतीजे चाहे जैसे भी आए हो, राजनीति रुकती नहीं। वह अपनी चाल से चलती ही रहती है।
दरअसल राष्ट्रीय जनता दल इन दिनों समीक्षा, शोध और भविष्य की नीतियां और रणनीतियां बनाने पर फोकस किए हुए है। तेजस्वी के लौटते ही आपको आरजेडी का पूरा एक्शन दिखना शुरु हो जाएगा। आरजेडी में पार्टी विरोधी गतिवधियों में शामिल नेताओं पर कार्रवाई की तैयारी है। ऐसे तमाम नेता जिन्होंने विधानसभा चुनाव में पार्टी द्वारा घोषित उम्मीदवारों का विरोध किया, दल के अनुशासन को तार तार किया, अब वैसे लोग आरजेडी में नहीं रह पाएंगे।
मिली जानकारी के अनुसार करीब 300 नेताओं की लिस्ट तैयार है, जिन पर विधानसभा चुनाव में पार्टी विरोधी कार्य करने का आरोप है। इसको लेकर पार्टी नेतृत्व कड़ा रुख अपनाने के मूड में है। इन सभी पर आरोप है कि ये लोग चुनाव के दौरान दूसरे दल के प्रत्याशी की मदद कर रहे थें या फिर पार्टी लाइन से इतर बयानबाजी कर रहे थें। इस लिस्ट में कई पूर्व विधायकों और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों के नाम भी शामिल हो सकते हैं।
हालांकि राजद की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है लेकिन एक्शन जरुर होगा और हार्ड होगा.....यह तय है।
नए साल में आरजेडी का पूरा फोकस संगठन की मजबूती और पार्टी के विस्तार पर होगी। इसमें कोई दो राय नहीं है कि बीते कुछ सालों में आरजेडी का सांगठनिक ढांचा चरमरा सा गया है। एक दौर था जब आरजेडी के पदाधिकारी और कार्यकता हर पंचायत में मौजूद रहते थें। बूथ स्तर पर आरजेडी की टीम होती थी, पर बदलते समय में ऐसी स्थिति नहीं रही। दिन प्रतिदिन आरजेडी का संगठन कमजोर हुआ है। आरजेडी की हार में एक बड़ा रोल संगठन का भी रहा। संगठन की कमजोरी का फायदा आरजेडी के विरोधी उठा ले गए।
चुनाव के समय तो आरजेडी की स्थिति ऐसी नजर आ रही थी कि संगठन में कार्यकर्ता कम और प्रत्याशी ज्यादा नजर आ रहे थें। जरुरत से ज्यादा संभावित प्रत्याशियों की भीड़ ने भी आरजेडी को नुकसान पहुंचाया। जिनको भी टिकट नहीं मिला उन्होंने पार्टी की जड़ खोदनी शुरु कर दी। आरजेडी को भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटना है तो पार्टी के भीतर के गद्दारों और भीतरघातियों को बाहर करना ही होगा ताकी ये सभी के लिए एक सबक हो सके।
राजनीति के जानकारों का मानना है किसी भी राजनीतिक दल की मजबूती के लिए सबसे पहली शर्त होती है पार्टी में अनुशासन। अगर आरजेडी को अपनी राजनीति को बचाए रखना है तो उन्हें कड़े फैसले लेने ही होंगे।
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