अगर तेजस्वी की रणनीति कामयाब हुई तो भाजपा जेडीयू को बड़ा झटका लग जाएगा...
बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सेटिंग गेटिंग का खेल शुरु हो गया है। राज्यसभा की 05 सीटों के लिए बिहार में चुनाव होने वाले हैं। विधायकों की संख्या बल को देखते हुए एनडीए को राज्यसभा की 04 सीटें मिलनी तय है। खेल पांचवीं सीट के लिए होना है।
राजनीति संख्या बल का खेल है। जिसके पास नंबर है, वो किंग है। जिसके पास नंबर नहीं है, वो नंबर का जुगाड़ कर किंग बनने का प्रयास करता है। यही तो राजनीति है।
बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सेटिंग गेटिंग का खेल शुरु हो गया है। राज्यसभा की 05 सीटों के लिए बिहार में चुनाव होने वाले हैं। विधायकों की संख्या बल को देखते हुए एनडीए को राज्यसभा की 04 सीटें मिलनी तय है। खेल पांचवीं सीट के लिए होना है। एनडीए की पूरी कोशिश होगी कि यह सीट विपक्ष यानी इंडिया महागठबंधन को न मिले। उधर तेजस्वी यादव ने भी जोड़ तोड़ की कोशिशें शुरु कर दी है। राजनीति में जोड़ तोड़ कोई नई बात नहीं है, वो तो जिस दिन से राजनीति शुरु हुई है, उस दिन से जोड़ तोड़ भी शुरु है।
राज्यसभा की इस पांचवीं सीट को लेकर तेजस्वी लगातार खामोश नजर आ रहे थें। अब उन्होंने दावा कर दिया है कि महागठबंधन एकजुट है और महागठबंधन के पास पांचवीं सीट को जीतने के लिए पर्याप्त संख्याबल भी मौजूद है।
गणित यह है कि एक राज्यसभा की सीट जीतने के लिए 41 वोटों यानी 41 विधायकों की जरुरत है। बिहार की सत्ता में बैठी एनडीए के पास कुल 202 सीटें हैं। एनडीए की 04 सीटों पर जीत तय है। विपक्ष की बात कर लें तो आरजेडी के पास 25, कांग्रेस के 06 और वामदलों के 03 और आईआईपी के 01 विधायक हैं। अगर इनमें एआईएमआईएम के 05 और बहुजन समाज पार्टी के भी 01 विधायक को जोड़ दें तो यह गणित 41 तक पहुंच जाता है। ये वो जादुई आंकड़ा है, जिसके जरिए इंडिया गठबंधन का एक राज्यसभा सांसद बिहार से दिल्ली पहुंच सकता है।
तेजस्वी ने इसके लिए प्रयास अभी से शुरु कर दिया है। गुरुवार को तेजस्वी यादव ने संपूर्ण विपक्ष की एक बैठक बुलाई। अगर एआईएमआईएम और बसपा का रुख साफ होता है तो राज्यसभा की पांचवीं सीट महागठबंधन के खाते में जा सकती है। हालांकि अभी तक साफ संकेत इन दोनों ही दलों की ओर से नहीं मिले हैं। बिहार विधानसभा में बसपा की एक सीट है। कैमूर जिले की रामगढ़ विधानसभा सीट से सतीश चंद्र यादव बसपा के विधायक हैं। सतीश का परिवार पुराना समाजवादी परिवार है और उनका बैकग्राउंड आरजेडी ही रहा है।
तेजस्वी यादव का कहना है कि उम्मीदवार तय होने जा रहा है। हमलोग उम्मीदवार उतारेंगे और चुनाव जीतेंगे। अभी तक एआईएमआईएम की ओर से यह कहा जा रहा है कि राज्यसभा की पांचवीं सीट पर हमने दावा किया है। हमें समर्थन किया जाए। संभावना व्यक्त की जा रही है कि आरजेडी की ओर से पूर्व सांसद डॉक्टर मोहम्मद शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब का नाम राज्यसभा चुनाव के लिए प्रस्तावित किया जा सकता है।
अगर आरजेडी हिना शहाब का नाम राज्यसभा चुनाव के लिए प्रस्तावित करती है तो एआईएमआईएम के पांच विधायकों की राजनीतिक मजबूरी हो जाएगी उन्हें समर्थन करने के लिए। अगर एआईएमआईएम ऐसा नहीं करती है या फिर क्रॉस वोटिंग करती है तो उनका सियासी वजूद खतरे में पड़ सकता है।
बता दें कि बिहार, बंगाल, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हरियाणा, आसाम, ओडिशा, तमिलनाडु आदि 10 राज्यों की 37 राज्यसभा की सीटें खाली होने की वजह से चुनाव हो रहे हैं। 16 मार्च को इसके लिए चुनाव कराए जाएंगे।
अगर तेजस्वी पूरे विपक्ष को साथ लाने में कामयाब होते हैं तो उनकी राजनीतिक क्षमता मजबूत होगी। अगर वो ऐसा नहीं कर पाते हैं तो पूरे पांच साल विपक्षी एकजुटता के लिए मुश्किल दौर होगा। कुल मिलाकर राज्यसभा की पांचवीं सीट विपक्ष और तेजस्वी यादव के रणनीतिक कौशल का एक महत्वपूर्ण इम्तिहान होने जा रहा है। वैसे सत्ताधारी पक्ष पूरी कोशिश करेगा कि विपक्ष के कुछ विधायक टूट जाएं या फिर क्रॉस वोटिंग करें। अब उंट किस करवट बैठेगा, देखना दिलचस्प होगा।
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