जेडीयू का काम खत्म, भाजपा की लड़ाई अब तेजस्वी से
जब पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को सुनियोजित तरीके से ट्रोल किया जाने लगा, उन्हें बदनाम किया जाने लगा तो जेडीयू की ओर से कोई मजबूत काउंटर नहीं हुआ।
पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह से लड़ाई लड़ने के लिए जेडीयू के नेताओं और प्रवक्ताआंे की फौज उतर गई लेकिन जब निशांत कुमार को ट्रोल किया जाता है तो जेडीयू नेता मैदान में क्यों नहीं आते ! जेडीयू के प्रवक्ताओं को सांप क्यों सूंघ जाता है। क्या जेडीयू को कोई और चला रहा है या फिर ये जेडीयू का आखिरी समय चल रहा है। अब बिहार की सियासी लड़ाई क्या तेजस्वी यादव और सम्राट चौधरी के बीच होने जा रही है !
ऐसे बहुत सारे सवाल लोगों के मन में आने लगे हैं जब से बिहार की राजनीति में आनंद मोहन का थैली वाला बयान सामने आया है। आनंद मोहन ने अपने बयानों से शांत पानी मंे कंकड़ जैसा फेंक दिया है। आनंद मोहन को जवाब देने के लिए एक से बढ़कर एक महारथी मैदान में उतर आएं। एमएलसी संजय सिंह, मंत्री लेसी सिंह, डुमरांव के विधायक राहुल सिंह सबने आनंद मोहन पर पलटवार किया।
लेकिन सवाल सबसे बड़ा यह है कि जब पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को सुनियोजित तरीके से ट्रोल किया जाने लगा, उन्हें बदनाम किया जाने लगा तो जेडीयू की ओर से कोई मजबूत काउंटर नहीं हुआ। जिस तरह से कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बदनाम करने के लिए अरबों रुपये खर्च कर दिए गए, कुछ वैसा ही नजारा निशांत कुमार के साथ भी देखने को मिला ! निशांत जनता की नजर में कमजोर और अयोग्य साबित कर दिए गए हैं क्योंकि कई लोग ऐसे हैं जो जेडीयू में रहकर जेडीयू को समाप्त करना चाहते हैं और भाजपा में छलांग लगाना चाहते हैं। समय आने पर ये सभी चेहरे बेनकाब हो जाएंगे।
निशांत कुमार ही जेडीयू का भविष्य हैं। अगर वही बदनाम हो जाएंगे तो जेडीयू का भविष्य खत्म हो जाएगा। काम इसी दिशा में हो रहा है।
उधर बिहार की राजनीति भी अब सम्राट बनाम तेजस्वी होती जा रही है। मीडिया भी इसी तरह का माहौल बना रहा है। एक तरफ तेजस्वी तो दूसरी तरफ सम्राट चौधरी। इस सियासी लड़ाई मंे जेडीयू का स्पेस खत्म होता जा रहा है। तेजस्वी यादव भी जो विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद शांत और शिथिल नजर आ रहे थें, वो भोजपुर बक्सर एमएलसी चुनाव में जीत मिलने के बाद आक्रामक नजर आ रहे हैं। कानून व्यवस्था से लेकर रोजगार और शिक्षा से जुड़े मामलों पर सरकार को घेर रहे हैं।
उधर जनता दल यूनाइटेड जो आज से कुछ महीने पहले तक बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा पॉवर सेंटर था, वो सिमटता हुआ दिखाई पड़ रहा है। जेडीयू धीरे धीरे अप्रासंगिकता की ओर बढ़ रही है। यह बात कई लोगों को खटक सकती है लेकिन सच्चाई तो यही है।
आनंद मोहन का बयान अनायास ही नहीं है। वो बड़े नेता हैं। जनाधार वाले नेता हैं। आनंद मोहन में दम है तभी उनकी पत्नी सांसद हैं और बेटा विधायक है। नीतीश कुमार के शुभचिंतकों में उनका नाम शामिल है। वो जो देख रहे हैं, वही बोल रहे हैं। आनंद मोहन ने जो सवाल उठाए हैं, जेडीयू के नेता उनका जवाब नहीं दे रहे हैं बल्कि पलटवार कर रहे हैं।
ऐसे में मिला जुला कर बिहार एक नए राजनीतिक युग की ओर बढ़ रहा है जहां एक ओर सीएम सम्राट चौधरी होंगे तो दूसरी तरफ उनके सामने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव होंगे। नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जेडीयू तेजी से अपने राजनीतिक पतन की ओर बढ़ चले हैं।
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