यादव बैठकी, राजपूत बैठकी, भूमिहार बैठकी.... ये सब चल क्या रहा है बिहार में !

अगर हम कहें कि बिहार जातियों के खांचे में बंटा एक राज्य है तो इसमें कोई गलत बात नहीं होगी। जातियों के आधार पर बंटे इस राज्य में होने वाली इन बैठकियों का उद्देश्य क्या है ! आज इस विषय पर हम विस्तार से चर्चा करेंगे।

Jun 1, 2026 - 10:49
Jun 1, 2026 - 10:50
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यादव बैठकी, राजपूत बैठकी, भूमिहार बैठकी.... ये सब चल क्या रहा है बिहार में !
भूमिहार परिवार फेसबुक पेज से साभार

बिहार में इन दिनों खूब बैठकी हो रही है। बैठकी का दौर चल रहा है। ये बैठकी साधारण नहीं है। ये बैठकी जाति के आधार पर हो रही है। इनमें यादव बैठकी, राजपूत बैठकी और भूमिहार बैठकी का ना सर्वाधिक प्रमुखता से लिया जा रहा है। क्या जातियों के आधार पर हो रही ये बैठकी बिहार की राजनीति का चेहरा बदलने जा रहा है। हालांकि इन बैठकियों को लेकर तरह तरह के बयान, समर्थन और तंज सब कुछ सामने आने लगे हैं। 

अगर हम कहें कि बिहार जातियों के खांचे में बंटा एक राज्य है तो इसमें कोई गलत बात नहीं होगी। जातियों के आधार पर बंटे इस राज्य में होने वाली इन बैठकियों का उद्देश्य क्या है ! आज इस विषय पर हम विस्तार से चर्चा करेंगे। 

इन बैठकियों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। यादव बैठकी हो, भूमिहार बैठकी हो या फिर राजपूत बैठकी। इन सभी में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं। कहीं न कहीं इन बैठकियों के बहाने बड़ी राजनीतिक लकीर खींचने की कोशिश हो रही है। इन बैठकियों के बाद ही सवर्ण यादव एकता की बात भी सुनाई पड़ने लगी है। 

हमें भूलना नहीं चाहिए कि ऐसी ही बैठकी की शुरुआत आरएसएस ने देश भर में की थी। वो खुद को सांस्कृतिक संगठन बताकर लोगों को जोड़ता रहा और उसकी गोद में भाजपा फलती फूलती रही। आज भाजपा पूरे भारत में जिस विराट स्वरुप में नजर आ रही है, उसके पीछे आरएसएस की वो बैठकी ही रही जिसे शाखा के नाम से जाना गया। 

शुरुआत हुई इसकी यादव बैठकी से। यादव समाज बिहार का एक ऐसा समाज है जिसके इर्द गिर्द ही बिहार की राजनीति चलती आ रही है। यादव बैठकी की शुरुआत चंद्रभानु यादव ने की। यादव बैठकी की शुरुआत पटना के गांधी मैदान से हुई और धीरे धीरे यह बिहार के सभी जिलो में होने लगीं। कह लें कि कई प्रखंडों में भी अब यादव बैठकी हो रही है। मतलब जहां भी यादव हैं, वहां बैठकी लग रही है। आमतौर पर यह बैठकी रविवार को ही होती है। इस यादव बैठकी में पूर्व सांसद साधु यादव भी शामिल हो चुके हैं। 

चंद्रभानु यादव साफ तौर पर कहते हैं कि आरजेडी अलग है और यादव अलग हैं। यादव बैठकी के मकसद के बारे में वो कहते हैं कि यादव समाज के साथ कई समस्याएं हैं, यादव समाज को लेकर कई समस्याएं हैं। उसके समाधान को लेकर इस यादव बैठकी की शुरुआत की गई है। यादवों की समस्या का समाधान यादव ही तो करेगा। 

वहीं राजधानी पटना में बीते रविवार को राजपूत बैठकी वीर कुंवर सिंह पार्क में हुई। इस बैठकी में बड़ी संख्या में क्षत्रिय समाज के लोग इकट्ठे हुए। इस मौके पर सिंह सेना नामक एक संगठन की घोषणा हुई। जाने माने यूट्यूबर और कमेंटेटर राणा दीपू सिंह इस राजपूत बैठकी के सूत्रधार हैं। सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखते हुए राणा दीपू सिंह कहते हैं कि हम सभी को आपसी द्वेष को भुलाकर समाज के उत्थान और विकास के बारे में सोचना है। मिलकर लड़ेंगे और बेहतर से बेहतर करेंगे। 

अब इसके बाद बारी आ जाती है भूमिहार ब्राह्मण बैठकी की। यह भूमिहार बैठकी भी काफी लंबे समय से चलता आ रहा है। भूमिहार परिवार नामक सोशल मीडिया पेज से यह पता लगता है कि बिहार के अलग अलग हिस्सों में 60 से ज्यादा भूमिहार बैठकी आयोजित हो चुकी है। इन बैठकियों में बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं और विभिन्न विषयों पर आपसी संवाद करते हैं। परस्पर सहयोग और समन्वय पर चर्चा होती है। एक दूसरे के दुख सुख में शामिल होने का प्रयास होता रहता है। 

अब सवाल यह उठता है कि बिहार में पिछले बीस सालों से चले आ रहे लव कुश समीकरण के बीच क्या ये बैठकियां कोई बड़ा बदलाव करने जा रही है क्योंकि भूमिहार और राजपूत समाज अपना 99 फीसदी वोट भाजपा और जेडीयू को करता आ रहा है लेकिन उनके हाथ राजनीतिक रुप से खाली होते जा रहे हैं। 

उधर यादव समाज की स्थिति के बारे में कहा जा रहा है कि सामाजिक न्याय के नाम पर वो सबकी लड़ाई अपने माथे पर उठा लेता है और उसका नुकसान भी उसे ही झेलना पड़ता है। दलितों और अति पिछड़ों की आरक्षण की लड़ाई यादव लड़ने लगता है कि दलित और अति पिछड़ों की जमात चुनाव में भाजपा के साथ हो जाती है। उधर सामान्य वर्ग यादवों को अपना दुश्मन समझता है, सो अलग हैै। 

ऐसे में ये बैठकियां जो खुद को गैर राजनीतिक बता रही हैं जैसे आरएसएस खुद को बताती है, वो बिहार की राजनीति के विमर्श और पैटर्न में कितना बदलाव लाएंगी और इनका भविष्य क्या होगा, देखना दिलचस्प होगा। 

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SIMRANJEET SINGH Diploma in media studies ( Ranchi ),8 years experience in news media, Political Expert Chief editor in Bihar News