वैशाख अमावस्या की रात घर के इन खास स्थानों पर दीप प्रज्जवलित करें, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार वैशाख अमावस्या की काली रात को दीपक प्रज्जवलित करने का विशेष विधान है। मान्यता है कि घर के 05 विशेष स्थानों पर उस रात दीप प्रज्जवलित करने से तमाम बाधाएं दूर होती हैं। घर से कर्ज और दरिद्रता दूर होती है। आइए, इस आलेख में उन 05 खास स्थानों की चर्चा करते हैं, जहां दीपक प्रज्जवलित करना चाहिए।
Baisakh Amawasya 2026 सनातन परंपरा में वैशाख अमावस्या का बड़ा ही महत्व है। प्रचलित भाषा में इसे सत्तू अमावस भी कहते हैं क्योंकि ये सतुआन के आसपास ही पड़ता है। यूं तो पितृ पक्ष को वर्ष की बड़ी तिथियों में गिना जाता है लेकिन वैशाख अमावस्या का भी कम महत्व नहीं होता है। यह वह दिन होता है जिस दिन हम अपने पितरों, पूर्वजों का स्मरण करते हैं। उन्हें मनाते हैं और आर्शीवाद प्राप्त करते हैं ताकी घर परिवार पर उनकी कृपा बनीं रहे।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार वैशाख अमावस्या की काली रात को दीपक प्रज्जवलित करने का विशेष विधान है। मान्यता है कि घर के 05 विशेष स्थानों पर उस रात दीप प्रज्जवलित करने से तमाम बाधाएं दूर होती हैं। घर से कर्ज और दरिद्रता दूर होती है। आइए, इस आलेख में उन 05 खास स्थानों की चर्चा करते हैं, जहां दीपक प्रज्जवलित करना चाहिए।
1. मकान का प्रवेश द्वार : वैशाख अमावस्य की शाम सूर्य की किरण डूबते ही प्रवेश द्वार के दोनों कोनों पर सरसों के तेल का दीपक प्रज्जवलित करें। इससे घर की नकरात्मकता दूर होती है। सकारात्मकता का प्रवेश होता है। अगर इस दौरान द्वार पर कोई पशु जैसे गाय, कुत्ते, बिल्ली आदि दिखाई दें तो उन्हें खाने के लिए कोई सामग्री अवश्य दे दें।
2. रसोईं घर : आपके रसोईं घर में वो जगह जहां पर पीने के लिए पानी रखा जाता है। उस जगह पर दीपक प्रज्जवलित करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। जहां साफ जल होता है, वहां पितृ निवास करते हैं। वंश में वृद्धि का आर्शीवाद प्राप्त होता है। मान्यताओं के अनुसार रसोईं घर में दीप जलाने से रोग दोष से मुक्ति मिलती है।
3. तुलसी का पौधा : घर में जहां भी मां तुलसी हो, वहां वैशाख अमावस की रात घी का दिया जलाएं। इससे मानसिक शांति मिलती है। घर में शांत वातावरण होता है। कहावत आपने सुना भी होगा कि शांति में ही तरक्की है।
4. दक्षिण दिशा : मान्यताओं के अनुसार घर के दक्षिण दिशा में पितरों का वास होता है। वैशाख अमावस्या की रात घर के दक्षिण हिस्से में घी का दीप प्रज्ज्वलित कर उसका मुख दक्षिण की ओर रखकर अपने पितरों का स्मरण करें। उनके आर्शीवाद के बगैर जीवन सुखद नहीं हो सकता।
5. पीपल का पेड़ : घर में पीपल का पेड़ तो नहीं ही होगा। प्रयास करें कि घर के आसपास किसी पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाए। इससे भाग्योदय होता है।
वैशाख अमावस्या 2026 कब है ?
वर्ष 2026 में वैशाख अमावस्या 16 अप्रैल गुरुवार को रात्रि 8 बजकर 11 मिनट से प्रारंभ होगी और 17 अप्रैल को संध्या 05 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में उदयतिथि को आधार मानते हुए इस वर्ष वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल को यानी शुक्रवार को मनाई जाएगी।
अस्वीकरण : यहां बताए गए तमाम उपाय महज सूचना के लिए है। हम इन उपायों का समर्थन नहीं करते हैं। यहां दी गई तमाम जानकारियां मान्यताओं पर आधारित है। पाठकों से आग्रह है कि अपने विवेक का प्रयोग करें। बिहार न्यूज किसी भी प्रकार के दावे या अंधविश्वास का समर्थन नहीं करता है।
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