होलिका दहन : ये 05 लोग अग्नि से रहें दूर, जानिए पूरी वजह
प्रचलित लोक मान्यताओं के अनुसार कई लोगों को होलिका दहन के समीप जाने और यहां तक उसे देखने से भी परहेज करना चाहिए। आप भी इस बारे में जानिए।
Holika Dahan 2026 हिंदू पंरपरा में होलिका दहन का काफी धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व होता है। होलिका दहन की रात्रि भी दीपावली की रात्रि की तरह काफी महत्वपूर्ण स्थान रखती है। दीपावली अमावस्या की रात मनाई जाती है जबकि होलिका दहन पूर्णिमा की रात होती है। मान्यता है कि होलिका दहन की अग्नि में तमाम नकारात्मक शक्तियां जलकर भस्म हो जाती है। पर यह भी माना जाता है कि होलिका की अग्नि कई लोगों के लिए अशुभ होती हैं। उन्हें होलिका दहन की अग्नि से बचकर ही रहना चाहिए।
प्रचलित लोक मान्यताओं के अनुसार कई लोगों को होलिका दहन के समीप जाने और यहां तक उसे देखने से भी परहेज करना चाहिए। आप भी इस बारे में जानिए।
सास और बहू : मान्यताओं के अनुसार सास और बहू को एक साथ खड़े होकर या बैठकर होलिका दहन नहीं देखना चाहिए। कई परिवारों का मानना है कि सास बहू के एक साथ होलिका दहन देखने से रिश्तों में खटास पैदा हो सकते हैं।
नई बहू या दुल्हन : भारतीय परंपरा में नई दुल्हन अपनी पहली होली ससुराल में नहीं मनाती हैं। वो अपने मायके में पहली होली मनाती हैं। प्राचीन कथाओं के अनुसार होलिका का विवाह इलोजी से होने वाला था। विवाह के पूर्व ही वो प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गईं थीं। इस वजह से नई दुल्हन अपनी पहली होली में ससुराल से दूर रहती हैं।
इकलौते बच्चे के माता पिता : प्रचलित मान्यताओं के मुताबिक जिनकी सिर्फ एक ही संतान होती है, वो माता पिता भी होलिका दहन देखने से परहेज करते हैं क्योंकि प्रह्लाद भी अपने पिता हिरण्यकश्यप की इकलौती संतान थें।
गर्भवती महिला : इस मान्यता के पीछे धार्मिक कारणों के साथ साथ स्वास्थ्य कारण भी हैं। होलिका दहन की अग्नि की तेज आंच और धुआं गर्भवती महिला के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होता है। यह धुआं गर्भवती महिला के साथ ही गर्भ में उनके बच्चे के लिए भी हानिकारक होता है।
नवजात बच्चे : नवजात शिशुओं को भी होलिका दहन के स्थान पर नहीं ले जाना चाहिए। हमने पहले भी बताया है कि होलिका दहन वाले स्थान पर नकारात्मक शक्तियां सक्रिय रहती हैं। इसके साथ ही वहां पर काफी भीड़ होती है। होलिका दहन की अग्नि से धुआं निकलता रहता है। यह नवजात बच्चों के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होता। वैसे तो ये मान्यताएं लोक आस्था और प्राचीन परंपराओं पर आधारित हैं लेकिन धार्मिक विश्वास के साथ ही ये स्वास्थ्य और सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी माननी जरुरी होती है।
DISCLAIMER : यह पूरा आलेख लोक मान्यताओं और प्राचीन परंपराओं पर आधारित है। इसे मानना या न मानना आपके विश्वास पर निर्भर करता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इनकी पुष्टि नहीं होती है।
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