05 दिनों के सीएम सतीश प्रसाद सिंह... विधायक बनने के लिए बेच दी थी जमीन...
1962 का समय था। परबत्ता से विधानसभा का चुनाव लड़ना था। परिवार से अलग हो जाने की वजह से पैसों की दिक्कत थी। जमीन का एक हिस्सा बेच दिया तो स्वतंत्र पार्टी से चुनाव लड़ गए। कांग्रेस की लक्ष्मी देवी जीत गई। सतीश बाबू हार गए। 1964 में लक्ष्मी देवी का निधन हो गया। उपचुनाव की घोषणा हुई। सतीश बाबू ने फिर से जमीन का एक टुकड़ा बेच दिया और निर्दलीय मैदान में उतर गए। उपचुनाव में भी वो हार गए।
सतीश प्रसाद सिंह बिहार के छठें मुख्यमंत्री थें। बिहार के सबसे कम समय तक मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड उनके नाम है। वो मात्र 05 दिनों तक राज्य के सीएम रहें। वो बिहार के पहले ओबीसी सीएम भी रहें। सतीश प्रसाद सिंह कुशवाहा बिरादरी से थें।
सतीश प्रसाद सिंह का जन्म खगड़िया जिले के परबत्ता ब्लॉक के कोरचक्का गांव में हुआ। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार उनका जन्म पहली जनवरी 1936 को हुआ था। उनके पिता विश्वनाथ सिंह इलाके के प्र्रतिष्ठित जमींदार थें। विश्वनाथ बाबू लगभग 400 बीघा जमीन के मालिक थें। मुंगेर से उन्होंने स्नातक की पढ़ाई की।
पढ़ाई के दौरान ही ज्ञानकला नाम की लड़की से मुलाकात, दोस्ती और फिर प्यार हो गया। जाति अलग थी। परिवार इस विवाह के खिलाफ था। सतीश प्रसाद सिंह ने ठान लिया कि शादी तो ज्ञानकला से ही करेंगे। समाजवादी विचारों वाले अक्खड़ सतीश प्रसाद सिंह ने परिवार के विरोध के बावजूद अपनी पसंद की लड़की से शादी कर ही ली। पिता ने सतीश बाबू को उनके हिस्से की जमीन जायदाद देकर परिवार से अलग कर दिया।
इसके बाद उनका राजनीतिक जीवन शुरु हुआ। 1962 का समय था। परबत्ता से विधानसभा का चुनाव लड़ना था। परिवार से अलग हो जाने की वजह से पैसों की दिक्कत थी। जमीन का एक हिस्सा बेच दिया तो स्वतंत्र पार्टी से चुनाव लड़ गए। कांग्रेस की लक्ष्मी देवी जीत गई। सतीश बाबू हार गए। 1964 में लक्ष्मी देवी का निधन हो गया। उपचुनाव की घोषणा हुई। सतीश बाबू ने फिर से जमीन का एक टुकड़ा बेच दिया और निर्दलीय मैदान में उतर गए। उपचुनाव में भी वो हार गए।
जमीन बेचकर दो बार चुनाव हारने वाले सतीश बाबू का हौंसला नहीं हारा। 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी का टिकट मिल गया। इस बार किस्मत ने साथ दिया। सतीश बाबू परबत्ता से विधायक बन गए। बिहार में कांग्रेस की हार हो गई। गैर कांग्रेसी सरकार का गठन हुआ। महामाया प्रसाद सिन्हा बिहार के सीएम बन गए।
कुछ ही समय बिता और यह गैर कांग्रेसी सरकार मतभेद का सामना करने लगी। सीएम महामाया प्रसाद सिन्हा ने सतीश बाबू की कहासुनी हो गई। सरकार अब जैसे तैसे चलने लगी। कांग्रेस का मौका मिल गया। विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पेश हुआ। सरकार गिर गई। कांग्रेेसी मुख्यमंत्री रहे केबी सहाय, सतीश प्रसाद सिंह और बीपी मंडल की तिकड़ी कामयाब हुई।
बीपी मंडल को मुख्यमंत्री बनाने की बात थी लेकिन वो लोकसभा के सांसद थें। उनका बिहार विधान मंडल के किसी भी सदन का सदस्य बनाना जरुरी था। इसके लिए सतीश प्रसाद सिंह को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। उन्होंने सीएम बनने के बाद बीपी मंडल को विधान परिषद में भेजने का निर्णय लिया। 29 जनवरी को बीपी मंडल विधान परिषद चले गए। 01 फरवरी को बीपी मंडल मुख्यमंत्री बन गए और इस तरह से 05 दिन के सीएम की कहानी का पटाक्षेप हो गया।
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