JDU का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा क्या ?

आज जेडीयू का हाल यह है कि नीतीश कुमार ने हजारों लोगों को सांसद, विधायक, एमएलसी, मंत्री, बोर्ड निगमों का सदस्य, चेयरमैन और बहुत कुछ बनाया होगा लेकिन जेडीयू की ओर से नीतीश कुमार के पक्ष में बोलने वाला तक कोई नहीं है।

Mar 6, 2026 - 19:46
Mar 6, 2026 - 20:18
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JDU का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा क्या ?

Bihar News 2026 बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जिस तरह से राज्य की सत्ता से विदा किया जा रहा है वो बेहद अपमानजनक महसूस हो रहा है। बिहार का वो हर नागरिक जो नीतीश कुमार का समर्थक है अथवा नहीं है, वो उनके साथ जैसा व्यवहार हो रहा है, वो देख कर दुखी है। नीतीश कुमार की पार्टी के समर्थकों का गुस्सा सबसे ज्यादा भारतीय जनता पार्टी पर है। नीतीश समर्थकों को लग रहा है कि भाजपा जबरन बिहार की सत्ता पर काबिज़ होने का प्रयास कर रही है जो कि अनुचित है। 

Nitish Kumar News सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड के पंचायत से लेकर प्रदेश तक के समर्पित कार्यकर्ताओं में बेहद नाराजगी है। नीतीश कुमार के स्वजातीय कुर्मी पटेल समाज के मतदाताओं का गुस्सा जगह जगह पर फूटा हुआ है। सोशल मीडिया से लेकर चाय की टपरी तक भाजपा की कथित धोखेबाजी की चर्चा शुरू है। 

तो ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि CM नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड का क्या होगा ? JDU का भविष्य क्या है ? 

आज जेडीयू का हाल यह है कि नीतीश कुमार ने हजारों लोगों को सांसद, विधायक, एमएलसी, मंत्री, बोर्ड निगमों का सदस्य, चेयरमैन और बहुत कुछ बनाया होगा लेकिन जेडीयू की ओर से नीतीश कुमार के पक्ष में बोलने वाला तक कोई नहीं है।

जेडीयू का कोई सांसद, कोई विधायक, कोई मंत्री यहां तक की एक प्रवक्ता भी उनके पक्ष में नहीं बोल रहा है, यह साफ है कि अब जेडीयू नीतीश कुमार की पकड़ से बाहर हो चुकी है। जेडीयू की कमान भाजपा के शुभचिंतकों अथवा भाजपा के इशारों पर काम करने वाले नेताओं के हाथों में पूरी तरह से आ चुकी है। 

अब सवाल है कि जेडीयू के सच्चे और ईमानदार कार्यकर्ता इन नेताओं के नेतृत्व में कितना दिन काम कर सकेंगे ? जिसने आजीवन नीतीश कुमार को अपना नेता माना, क्या वो ललन सिंह, संजय झा, विजय चौधरी और अशोक चौधरी जैसे लोगों को अपना नेता मानेंगे ? 

कई लोग तो इन्हीं नेताओं को विभीषण बता रहे हैं जिन्होंने जनता दल यूनाइटेड और नीतीश कुमार को नुकसान पहुंचा कर ही दम लिया।

जेडीयू का कार्यकर्ता समाजवादी विचारधारा को मानता है। भारतीय जनता पार्टी के साथ उनका गठबंधन राजनीतिक परिस्थितियों पर आधारित है ना कि कोई ठोस वैचारिक आधार पर। जेडीयू में ज्यादातर संख्या वैसे नेताओं की है जो दूसरे दलों से आए हैं, ऐसे में जेडीयू के कार्यकर्ता इन नेताओं को नेता नहीं मानने जा रही है। बिना नीतीश कुमार कुर्मी पटेल समाज भी ललन सिंह, संजय झा, विजय चौधरी, अशोक चौधरी को अपना नेता नहीं मानने जा रहा है। कुर्मी ही साथ नहीं रहेगा तो जेडीयू में रहेगा कौन ? 

दूसरी ओर सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की बात कर लें तो उनमें कोई खास काबिलियत दिखाई नहीं देती। उनका एक ही गुण है कि वो नीतीश कुमार के पुत्र हैं। ऐसे में वो जदयू को बचा लेंगे या उबार लाएंगे, ऐसी संभावना दूर दूर तक नजर नहीं आ रही है। 

ऐसे में हमारा स्पष्ट रूप से मानना है कि नीतीश कुमार के बिना जनता दल यूनाइटेड का भविष्य बहुत दूर तक जाता हुआ दिखाई नहीं दे रहा। जदयू के तमाम बड़े नेता आने वाले समय में भाजपा के साथ जाते हुए नज़र आ सकते हैं क्योंकि उन्हें सत्ता चाहिए और दूसरी तरफ जेडीयू के समाजवादी विचारधारा वाले कार्यकर्ता राजद की ओर रुख कर सकते हैं।

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SIMRANJEET SINGH Diploma in media studies ( Ranchi ),8 years experience in news media, Political Expert Chief editor in Bihar News